
मौलिक कहानियाँ
पैटर्न जो बिन्दु घर
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आज सुबह नीदा दादी ऊन का हाथ पकड़कर बाज़ार में गई। दादी ने पूछा, “क्या हम ध्यान से देखने वाला खेल खेलें? बाज़ार में कौन-सा रंग छिपा है?” नीदा ने आँखें बड़ी कीं। “ढूँढ़ो, ढूँढ़ो, ढूँढ़ो!” दादी मुस्कुराईं। “रंग, आकार और नमूना देखो—हम चीज़ों को कई तरीकों से खोज सकते हैं।”
दादी ने पहली थाली की ओर इशारा किया। “गोल और चिकना क्या है, जिसके ऊपर तारे जैसा डंठल है?” नीदा ने भी इशारा किया। “टमाटर!” वहाँ कौन-सा रंग छिपा था? “लाल!” गोल, चिकना, लाल—एक रंग मिल गया।
अगला फल मुस्कान की तरह मुड़ा था और उसके छिलके पर छोटे-छोटे धब्बे थे। “केले!” नीदा हँसी। वहाँ कौन-सा रंग छिपा था? “पीला!” मुड़ा हुआ, धब्बेदार, पीला—एक और रंग मिल गया।
अगली थाली में लंबी चीज़ें एक कतार में रखी थीं और उनकी सतह पर छोटे-छोटे उभार थे। “खीरे!” नीदा ने कहा। वहाँ कौन-सा रंग छिपा था? “हरा!” लंबे, उभरे हुए, हरे—एक और रंग मिल गया।
जाने से पहले नीदा ने बूँद जैसे आकार, तारे जैसे डंठल और चमकदार सतह वाली सब्ज़ी देखी। “बैंगन—बैंगनी!” वह बोली। फिर उसने दादी से पूछा, “बाज़ार में कौन-सा रंग छिपा है?” दादी ने दोनों हाथ फैलाए। “गोल, मुड़े हुए, लंबे—हमने रंग, आकार, नमूने और सतह से सबको खोज लिया!”
हम केवल रंग पर निर्भर हुए बिना रंग, आकार, नमूने और सतह से चीज़ों को पहचान सकते हैं।
नीदा और दादी ऊन सुबह के बाज़ार में रंग खोजने का खेल खेलती हैं। टमाटर, केले, खीरे और बैंगन को रंग, आकार, नमूने और सतह से पहचानते हुए वे जानती हैं कि किसी चीज़ को खोजने के कई तरीके होते हैं।
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