
ईसप की कहानियाँ
भालू और दो यात्रा करनेवाले
⏱ 2–4 मिनट
एक सिंह जंगल में एक बड़े पेड़ के नीचे सो रहा था जब एक छोटे से माउस ने उसके पार बिना सोचे - समझे उसे जगा दिया, और उसे भड़काकर भड़का दिया ।
सिंह ने सिंह ने अपने सिंह के नीचे झिलमिला ली, और वह जवान अत्यन्त भय के साथ बोला, मुझे जाने दे; एक दिन मैं तेरी भी सहायता कर सकता हूं। सिंह हंसता तो रहा, परन्तु उसको विदा करता रहा।
कुछ दिनों बाद सिंह शिकारी के जाल में फंस गया; और चाहे वह कितना ही कठिन क्यों न हो, रस्सियों को कसता रहा, और निराशा में डूबा हुआ था।
उस छोटे से जवान ने गरजते हुए शब्द सुना, और दौड़कर दौड़कर उस पर टूट पड़े ।
सिंह ने छोटे से छोटे बच्चों को अपने पूरे मन से धन्यवाद दिया; उस दिन से वे दोनों सच्चे मित्र बन गए, और सिंह ने फिर कभी किसी छोटे प्राणी को न देखा।
चाहे तू कितनी ही छोटी क्यों न हो, तौभी तू सर्वदा किसी की सहायता कर सकता है; कृपा का आकार नहीं बढ़ता।
सिंह एक बार सिंह के जाल से चर रहा होता है, कि सिंह मुक्त होकर अपना पीछा करे।
Parents' guide
Children who have felt too small to help or enjoy reversed expectations. Ability depends on the situation, not only size or authority.
The lion traps the mouse, and later a hunter's net traps the lion. A child may fear that the lion will eat the mouse or be harmed; it is fine to say that both survive.
Materials: 6 pieces of paper, pencil
Do not use the story to say a child must always help an adult. Children may refuse unsafe or overwhelming tasks and call another trusted adult.
The mouse need not prove its worth by being useful. Every character has worth before doing something for another.
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