
थाई लोककथाएँ
फाया खान खानक और गायब बरसात
⏱ 5–7 मिनट
बहुत समय पहले आओ नोई में ता मोंग लाई और याई रामफुएंग साथ मिलकर मछलियाँ पकड़ते और जाल ठीक करते थे। उनकी बेटी योमदोई हवा का रुख पढ़ सकती थी, लहरों को समझती थी और अपना रास्ता स्वयं चुनना चाहती थी। उसकी सुंदरता से भी दूर तक उसकी कुशलता की चर्चा पहुँचती थी।
एक दिन फेत्चाबुरी से चाओ लाई आया और उसने योमदोई को बेहतर जानने की इच्छा जताई। उसके शिष्ट व्यवहार से प्रभावित होकर याई रामफुएंग ने उससे बेटी के विवाह का वादा कर दिया। अगले दिन दूर से आया एक व्यापारिक जहाज़ खाड़ी में पहुँचा और ता मोंग लाई ने भी चीन के एक राजा के बेटे से वही वादा कर दिया। माता-पिता दोनों को लगा कि वे बेटी के लिए सबसे अच्छा भविष्य चुन रहे हैं। दोनों में से किसी ने योमदोई से नहीं पूछा।
तय सुबह चाओ लाई की बारात फेत्चाबुरी की भेंटें लेकर समुद्र-तट के रास्ते आई। व्यापारिक जहाज़ की बारात चीन की भेंटें लेकर समुद्र की ओर से बढ़ी। दोनों एक साथ घर पहुँचीं और उनके ढोल एक-दूसरे के ऊपर बजने लगे। तभी ता मोंग लाई और याई रामफुएंग को पता चला कि उन्होंने अलग-अलग लोगों से एक ही वादा कर दिया था।
उनकी बहस ढोलों से भी ऊँची होने लगी। तभी समुद्र की तेज़ हवा ने थालियों से टोपियाँ, मूसल, प्लेटें, खाने की तीलियाँ, सुपारी और मिठाइयाँ उड़ा दीं। कुछ चीज़ें पहाड़ियों के पास गिरीं और कुछ लहरों के पार चली गईं। बाद में लोग बताते थे कि वे को मुआक, को साक, को चान, खाओ ताकियाप, को माक और तट के दूसरे भू-चिह्न बन गईं।
“कृपया रुक जाइए!” योमदोई आँगन में आगे आई। “माँ और पिता मुझसे प्रेम करते हैं, लेकिन मैं थाली पर रखी कोई भेंट नहीं हूँ जिसे बाँटा या किसी को दे दिया जाए। मेरे जीवन के हर फैसले में मेरी आवाज़ शामिल होनी चाहिए।” चाओ लाई और राजा के बेटे ने अपनी थालियाँ नीचे कर दीं। वे मान गए कि जो उत्तर योमदोई ने स्वयं न दिया हो, वह अभी उत्तर है ही नहीं।
ता मोंग लाई और याई रामफुएंग ने बेटी से माफ़ी माँगी और साथ मिलकर सगाई की भेंटें लौटा दीं। दोनों बारातें बिना किसी विजेता या हारने वाले के लौट गईं। योमदोई नाव चलाती रही, हवा का रुख पढ़ती रही और अपना भविष्य स्वयं चुनती रही। जब लोग अनोखी आकृति वाली पहाड़ियों और द्वीपों की ओर इशारा करते, तो उस दिन की कहानी सुनाते जब दो वादों ने सबसे महत्वपूर्ण आवाज़ को लगभग दबा दिया था।
अच्छी नीयत हमें किसी दूसरे का जीवन तय करने का अधिकार नहीं देती। किसी और से जुड़ा वादा करने से पहले हमें उससे पूछना और उसकी बात सुनना चाहिए।
जब योमदोई से पूछे बिना उसके माता-पिता अलग-अलग विवाह प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं, तो दो बारातें एक ही समय पर आओ नोई पहुँच जाती हैं। समुद्री हवा भेंटों को उड़ाकर किंवदंती में वर्णित भू-आकृतियों में बदल देती है। इस अफरा-तफरी के बीच योमदोई सबको रोकती है और अपने जीवन का उत्तर स्वयं देने का अधिकार वापस लेती है।
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